दिल की आवाज

एक जाना पहचाना अजनबी, किस गुनाह की सजा मिल रही उसे

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विराट लव गुरु 💔

 

Milan; An Unfinished Story- Part 1

 

आज मेरी उस शख्स से मुलाकात हुई। कुछ कुछ मेरे जैसा ही था, हां शायद मेरे जैसा था। पर वह में नहीं था, वह में हो ही नहीं सकता। बिखरे बाल, चेहरे पर घौंसले की तरह दाढ़ी, डबडबाई आंखों में अजीब सा सूनापन, जैसे किसी की खोज में पथरा गयीं हों। ढेरों सिलवटें लिए हुए कपड़ों से ढंका तन, पैरों में दम तोड़तीं चप्पलें, मानो कह रहीं हों, “बस अब तेरे साथ और नहीं चला जाता।” यह में हो ही नहीं सकता, फिर कौन है यह शख्स ? क्यों मुझे जाना पहचाना सा लग रहा है ? क्यों ऐसा लग रहा है जैसे इस शख्स को बहुत नजदीक से जानता हूँ में।

 

 

कुछ धुंधली सी स्मृतियों को कुरेद कर उस अजीब इंसान का चेहरा याद करने की कोशिस कर रहा हूं। स्मृतियों में जो चेहरा बार बार आ रहा है वह यह शख्स तो नहीं हो सकता। शायद वही है यह, पर इतना बदलाव क्यों और कैसे। में डूबता चला गया आज से करीब पांच साल पहले की स्मृतियों में। एक जीवंत चेहरा, होठों पर मुस्कान, मिलनसार स्वभाव से किसी को भी अपना बना लेने हुनर। जो भी एक बार मिल ले आसानी से भूल नहीं सकता था उस चेहरे को। पहनावा कोई खास नहीं था, पर लोग उसकी तरह पहनना चाहते थे। रंग, रूप, कद काठी कोई खाश नहीं थी, पर लोग उसकी तरह होना चाहते थे। दोस्तों की लंबी कतार थी उसके साथ। दोस्त भी ऐसे जो उसके एक इशारे का इंतजार करते थे।

 

 

जिंदगी में कोई खाश सफलता तो नहीं मिली थी उसे, पर जो भी करता था उसमें एक अलग ही पहचान होती थी। गुस्सा था, जिद थी उसके अंदर, जिसे कमजोरी नहीं वह अपनी ताकत बनाये था। तूफानों में दिया जलाने की जिद देखी है उसके अंदर। मेने उसे जिंदगी में संघर्ष करते भी देखा है। जिंदगी दर्द दे कर हार जाती थी पर उसके चेहरे से वह मुस्कान कभी गायब नहीं होती थी। दर्द में निखरते देखा है मेने उसे। ऊपर से जितना सख्त अंदर से उतना ही कोमल दिल। किसी के आंसू पोंछने में सबसे आगे देखा है उस सख्स को मैने। अन्याय औऱ अत्याचार के खिलाफ चट्टान बनकर खड़े होते देखा है उसे।

 

 

हां यह वही शख्स तो है जिसे में पांच साल पहले मिला था। पर यह पांच साल पहले वाला शख्स तो नहीं। आखिर क्या हुआ इन पांच सालों में। वह हँसमुख इंसान इतना चिड़चिड़ा, इतना रूखा आखिर कैसे हो गया। आज यह शख्स बिल्कुल अकेला है, आखिर कहां गयी दोस्तों की वह लंबी चौड़ी फौज। ऐसा क्या किया इसने की आज सभी इसे अकेला छोड़ कर चले गए। आखिर इस ने वह कौन सा गुनाह किया जो पूरी जिंदगी बदल ली खुद की । किस गुनाह ने इसका वह दबंग रूप छीन लिया। आज क्यों इसे देख कर बेचारगी महसूस हो रही है। जिसे देख कर घमंड होता था आज क्यों मुझे उस पर तरस आ रहा है। जिसे दर्द छू कर निकल जाता था आज उसके चेहरे पर उमड़ता दर्द का यह तूफान क्या कहना चाहता है। जितना सोचता हूँ घूम फिर कर वही सवाल आता है। यदि यह वही शख्स है तो इन पांच सालों में ऐसा क्या हुआ, जिसका कोई जवाब नहीं मिल रहा फिलहाल…

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