हमीरपुर; मन की घुटन सहन नहीं हुई तो फांसी पर झूल गया व्यापारी, मौत के साथ दफन हुआ राज
नेहा वर्मा, संपादक ।
हमीरपुर जनपद के राठ नगर निवासी एक फर्नीचर व्यापारी को कोई बात मन ही मन खाए जा रही थी। वह अपनी परेशानी किसी से बता भी नहीं सकते थे। अपनी परेशानी से निजात के लिए उन्होंने खौफनाक कदम उठाने की योजना बना डाली। तीन दिन पहले रस्सी खरीद कर अपने गोदाम में रख ली। गुरूवार सुबह उसी रस्सी से फांसी पर झूल कर जीवन लीला समाप्त कर ली। व्यापारी की मौत पर उनके मासूम बच्चे अनाथ हो गए हैं।
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राठ नगर के सिकंदरपुरा मोहल्ला निवासी राकेश कुमार गुप्त (42) पुत्र बृजभूषण गुप्त फर्नीचर की दुकान किए थे। चरखारी रोड पर दुकान के ऊपर आवास में परिवार सहित रहते थे। जबकि दुकान के पीछे गोदाम में माल स्टोर रहता है। राकेश बीते कुछ दिनों से मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे। घर वालों के काफी पूंछने पर भी उन्होंने परेशान रहने की वजह नहीं बताई। गुरूवार सुबह करीब 7 बजे दुकान के पीछे गोदाम में पहुंच कर उन्होंने फांसी लगा ली।
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राकेश ने आत्महत्या करने की करीब चार दिन पूर्व ही ठान ली थी। क्योंकि उन्होंने जिस रस्सी से फांसी लगाई वह चार दिन पूर्व ही बाजार से खरीद कर लाए थे। कर्मचारियों द्वारा रस्सी लाने की वजह पूंछने पर वह टाल गए थे। सुबह करीब 9 बजे राजेंद्र व सबसे छोटे भाई श्यामू कारखाने पहुंचे। जहां गोदाम में राकेश का शव फांसी पर झूलते मिला। मृतक अपने पीछे पत्नी रानी, पुत्र सक्षम (12) व पुत्री मिस्ट्री (3) को रोता बिलखता छोड़ गए हैं। सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया है।
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दोपहर डेढ़ बजे तक इंतजार करने के बावजूद पोस्टमार्टम के लिए डाॅक्टर नहीं पहुंचे। भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष केके बंटी ने बताया कि पोस्टमार्टम के लिए डाॅ शरद विश्वकर्मा की ड्यूटी थी। जो बिना अवकाश लिए ही अपने घर कानपुर चले गए। डाॅक्टर से बात करने के बाद उन्होंने सीएमओ से शिकायत की। दूसरे डाॅक्टर की व्यवस्था न होने पर एसडीएम अशोक यादव को लिखित में शिकायत दी। जिसके बाद सीएचसी के डाॅ भरत राजपूत को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। करीब ढाई बजे पोस्टमार्टम हो पाया।

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