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कृषि मंत्री ने कहा सरकार सभी मुद्दों पर बात करने को तैयार, टिकैत बोले कृषि कानून खत्म करो

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नेहा वर्मा, संपादक ।

 

कृषि कानूनों के खिलाफ देश भर में किसान संगठनों द्वारा आंदोलन किये जा रहे हैं। राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर विभिन्न राज्यों के किसान बीते 54 दिन से आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच केंद्र सरकार व किसानों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है। अभी तक सभी वार्ताएं बेनतीजा निकलीं हैं। किसान संगठन कृषि कानूनों को पूरी तरह से रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं। जबकि सरकार कानूनों को रद्द करने से साफ इंकार करते हुए किसानों की आशंकाओं को दूर करने का आश्वासन दे रही है। इस सब के बीच कड़ाके की ठंड में किसान आंदोलन पर डटे हुए हैं ।

 

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किसान आंदोलन पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कोर्ट का हवाला देते हुए किसान संगठनों से आंदोलन समाप्त करने की अपील की है। कृषि मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कानूनों के क्रियान्वयन को रोक दिया है। में समझता हूं कि अब जिद का सवाल ही खत्म हो जाता है। अपेक्षा जताई कि 19 जनवरी को होने वाली बैठक में कानून के एक एक क्लॉज पर किसान नेता चर्चा करें। उन्होंने कहा कि कानूनों को रद्द करने के अलावा क्या विकल्प चाहते हैं वह सरकार के सामने रखें। कृषि मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने किसान यूनियन के साथ एक बार नहीं बल्कि 9 बार घंटों वार्ता की है। हमने लगातार किसान यूनियन से आग्रह किया कि वो कृषि कानूनों के क्लॉज पर चर्चा कर अपनी आपत्तियों से सरकार को अवगत कराएं। सरकार उस पर विचार एवं संसोधन करने को तैयार है।

 

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वहीं भारतीय किसान यूनियन कृषि कानूनों पर किसी भी प्रकार के समझौते को तैयार नहीं है। यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि क्लॉज पर चर्चा वह करेगा जिसे कानून में संसोधन कराना हो। यह हमारा सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह तीनों कानून खत्म करने पड़ेंगे। वहीं किसान आंदोलन में सहयोग करने वालों पर कार्रवाई से किसान संगठनों में उथलपुथल मची है। क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा कि एनआईए ने उन लोगों पर मामले दर्ज करने शुरू कर दिए हैं जो किसान आंदोलन का हिस्सा हैं या जिन्होंने इनका समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई की सभी किसान संघ निंदा करते हुए हर संभव तरीके से लड़ाई जारी रखेंगे।

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